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छत्तीसगढ़ के लोक तिहार इहाँ के संस्कृति

EduVista India जनवरी 31, 2026 (अंतिम अद्यतन: फ़रवरी 2, 2026) 1 मिनट पढ़ें

छत्तीसगढ़ के लोक तिहार

भूमिका

छत्तीसगढ़ के लोक तिहार इहाँ के संस्कृति, परंपरा अउ जनजीवन के आत्मा आय। ए तिहार मन प्रकृति, खेती-किसानी, देवी-देवता अउ सामाजिक एकता ले जुड़े रहिथें। लोक तिहार केवल उत्सव नई, बल्कि छत्तीसगढ़ी समाज के जीवन दर्शन आय।

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1. ✍️ निबंध : हरेली तिहार

छत्तीसगढ़ के लोकजीवन म हरेली तिहार के बहुत बड़ा महत्व हे। ए तिहार हर साल सावन महीना के अमावस्या तिथि म मनाय जाथे। हरेली तिहार मुख्य रूप ले किसान अउ खेती–किसानी से जुड़े तिहार आय। ए तिहार हरियाली, प्रकृति अउ मेहनत के सम्मान के प्रतीक आय।

“हरेली” शब्द “हरियाली” ले बने हे। सावन लगते ही खेत-खार, जंगल-पहाड़ हरियर हो जाथें। चारों ओर हरियाली दिखथे अउ मनखे के मन खुश हो जाथे। हरेली तिहार प्रकृति के स्वागत अउ खेती के शुरुआत के संकेत आय।

हरेली तिहार के दिन किसान अपन खेती के औजार जइसे हल, कुदारी, गैंती, फावड़ा, रापा आदि के पूजा करथें। औजार मन ला साफ-सुथरा करके ओकर पूजा करना, किसान के मेहनत अउ साधन के सम्मान ला दर्शाथे। ए दिन किसान अपन पशुधन जइसे बैल, गाय के भी सेवा करथें अउ ओकर रक्षा के कामना करथें।

हरेली तिहार म गांव-गांव म बच्चे मन गेड़ी खेलथें। गेड़ी चढ़ना हरेली तिहार के खास पहचान आय। बच्चे मन खुशी-खुशी गेड़ी चढ़के गांव भर घूमथें। ए खेल ले शारीरिक संतुलन अउ साहस के विकास होथे। गेड़ी खेलना केवल मनोरंजन नई, बल्कि परंपरा के जीवित रखे के माध्यम आय।

हरेली तिहार के दिन घर-घर म नीम के डार लाके दरवाजा म बांधे जाथे। नीम के डार बुरी बीमारी अउ नकारात्मक शक्ति ले बचाय के प्रतीक मानाय जाथे। गांव म लोग एक-दूसर ला हरेली के बधाई देवथें अउ आपसी भाईचारा बढ़थे।

आज के समय म हरेली तिहार केवल धार्मिक या पारंपरिक तिहार नई रहिस, बल्कि ए पर्यावरण संरक्षण के संदेश भी देथे। हरेली के समय पेड़-पौधा लगाय के परंपरा बढ़त हे, जऊन प्रकृति के रक्षा खातिर जरूरी आय।

हरेली तिहार छत्तीसगढ़ के संस्कृति के आत्मा आय। ए तिहार किसान, प्रकृति अउ लोकजीवन के गहरा संबंध ला दिखाथे। हरेली तिहार मनखे ला सिखाथे कि मेहनत, प्रकृति अउ परंपरा के सम्मान कर के ही जीवन सुखी बन सके।

निष्कर्ष

हरेली तिहार केवल एक तिहार नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के पहचान आय। ए तिहार हमन ला अपन संस्कृति, खेती अउ प्रकृति ले जोड़े रखथे। हरेली तिहार के परंपरा ला संजो के रखे हमर जिम्मेदारी आय। हरेली तिहार

हरेली तिहार सावन अमावस्या के दिन मनाय जाथे। ए तिहार हरियाली, खेती अउ औजार पूजा के प्रतीक आय। किसान अपन हल, कुदारी, गैंती के पूजा करथें। बच्चे गेड़ी खेलथें अउ नीम डार घर म बांधे जाथे। हरेली तिहार प्रकृति संरक्षण अउ मेहनत के सम्मान सिखाथे।


2. ✍️ निबंध : छेरछेरा तिहार

छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति म छेरछेरा तिहार के विशेष महत्व हे। ए तिहार हर साल पौष महीना के पूर्णिमा तिथि म मनाय जाथे। छेरछेरा तिहार मुख्य रूप ले दान, समानता अउ सामाजिक एकता के प्रतीक आय। ए तिहार किसान, मजदूर अउ गरीब वर्ग के जीवन ले गहरा संबंध रखथे।

छेरछेरा तिहार के दिन गांव-गांव म बच्चे, जवान अउ बुजुर्ग मन टोली बना के घर-घर जाथें अउ गाथें—
“छेरछेरा, छेरछेरा… माई कोठी के धान ला छेरछेरा!”
ए गीत के माध्यम ले लोग घर के मालिक ले धान, चावल, अन्न या दान मांगथें। घर के मालिक खुशी-खुशी दान देवथें, काबर ए मान्यता हे कि छेरछेरा के दिन दान करे ले घर म सुख-समृद्धि बने रहिथे।

छेरछेरा तिहार के मूल भावना “सबके पेट भरे” आय। ए तिहार अमीरी–गरीबी के भेद ला मिटाथे। ए दिन धनी अउ गरीब, बड़े अउ छोटे सब बराबर बन जाथें। दान ले समाज म आपसी सहयोग अउ भाईचारा बढ़थे।

ए तिहार किसान जीवन ले भी जुड़ा हे। धान के कटाई के बाद किसान के घर अन्न भरपूर हो जाथे। छेरछेरा के माध्यम ले किसान अपन मेहनत के फल समाज संग बांटथे। ए तिहार सिखाथे कि अन्न केवल खुद खातिर नई, बल्कि समाज खातिर भी हे।

छेरछेरा तिहार म बच्चों के भूमिका बहुत खास होथे। बच्चे मन छेरछेरा गीत गाके लोकसंस्कृति ला जिंदा रखथें। ए गीत मन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलत आ रहिन, जऊन छत्तीसगढ़ी भाषा अउ परंपरा के संरक्षण करथे।

आज के आधुनिक समय म छेरछेरा तिहार के रूप बदले हवय, फेर ओकर भावना आजो जीवित हे। अब कई जगह लोग अनाज के संग कपड़ा, पैसा अउ जरूरत के सामान भी दान करथें। छेरछेरा तिहार आज सामाजिक सेवा अउ मानवता के संदेश देथे।

छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ के लोकजीवन के आत्मा आय। ए तिहार सिखाथे कि दान ले मन बड़ा होथे अउ समाज मजबूत बनथे।

निष्कर्ष

छेरछेरा तिहार केवल एक लोकपर्व नई, बल्कि मानवता, समानता अउ सहयोग के प्रतीक आय। ए तिहार हमन ला सिखाथे कि अपन सुख समाज संग बांट के ही सच्चा आनंद मिलथे। छेरछेरा तिहार के परंपरा ला बचाय रखना हमर सांस्कृतिक जिम्मेदारी आय। छेरछेरा तिहार

छेरछेरा तिहार पौष पूर्णिमा के दिन मनाय जाथे। ए तिहार दान अउ समानता के प्रतीक आय। लोग घर-घर जाके धान, अन्न अउ दान मांगथें। छेरछेरा सिखाथे कि समाज म सबके पेट भरे अउ कोई भूखा नई रहे।


3. ✍️ निबंध : फागुन तिहार

छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति म फागुन तिहार के बहुत खास स्थान हे। ए तिहार फागुन महीना म मनाय जाथे अउ खुशी, प्रेम, भाईचारा अउ लोकगीत के प्रतीक आय। फागुन तिहार के समय प्रकृति म भी बदलाव दिखथे—पेड़ म नई पत्ती, फूल फुलाथें अउ मौसम सुहावना हो जाथे।

फागुन तिहार छत्तीसगढ़ म केवल रंग खेले के पर्व नई हे, बल्कि लोकपरंपरा अउ सामूहिक आनंद के तिहार आय। गांव-गांव म फाग गीत, फाग नाचा, होलका अउ होली के आयोजन होथे। लोग ढोल, मांदर, झांझ के संग फाग गीत गाथें अउ पूरा गांव म उत्सव के माहौल बन जाथे।

फागुन तिहार म लोग एक-दूसर ला रंग-गुलाल लगाथें अउ गले मिलके खुशी बांटथें। पुरानी रंजिश, मनमुटाव भुलाके सब लोग एक हो जाथें। ए तिहार सामाजिक समरसता के संदेश देथे।

फागुन तिहार के एक महत्वपूर्ण परंपरा होलका दहन आय। होलका दहन बुराई ऊपर अच्छाई के जीत के प्रतीक आय। ए दिन लोग आग के चारों ओर इकट्ठा होके पूजा करथें अउ बुरे विचार ला त्यागे के संकल्प लेथें।

छत्तीसगढ़ी फाग गीत म हास्य, व्यंग्य अउ जीवन दर्शन के सुंदर मेल दिखथे। ए गीत मन लोकजीवन के संघर्ष, प्रेम अउ खुशी ला सरल भाषा म प्रस्तुत करथें। फागुन तिहार के समय गांव के बूढ़ा-बुजुर्ग, जवान अउ बच्चे सब एक संग नाच-गान करथें।

फागुन तिहार किसान जीवन ले भी जुड़ा हे। रबी फसल के समय किसान थकान भूलाके आनंद मनाथें। ए तिहार मेहनत के बाद के खुशी के प्रतीक आय।

आज के आधुनिक समय म फागुन तिहार के रूप म कुछ बदलाव आय हें, फेर मूल भावना आजो जिंदा हे। अब लोग प्राकृतिक रंग के उपयोग अउ पानी बचाय के संदेश भी देथें।

निष्कर्ष

फागुन तिहार केवल रंग के पर्व नई, बल्कि प्रेम, मेल-जोल अउ सांस्कृतिक एकता के तिहार आय। ए तिहार हमन ला सिखाथे कि खुशी बांटे ले बढ़थे अउ समाज मजबूत बनथे। फागुन तिहार के परंपरा ला संजो के रखे हमर जिम्मेदारी आय। फागुन तिहार

फागुन तिहार फागुन महीना म मनाय जाथे। ए तिहार रंग, खुशी अउ भाईचारा के पर्व आय। फाग गीत, फाग नाचा, होलका दहन अउ होली के आयोजन होथे। फागुन तिहार सामाजिक समरसता अउ आनंद के संदेश देथे।


4. ✍️ निबंध : देवारी तिहार

छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति म देवारी तिहार के विशेष महत्व हे। ए तिहार हर साल कार्तिक महीना के शुक्ल पक्ष म मनाय जाथे। देवरी तिहार ला कई जगह देवउठनी तिहार भी कहे जाथे। ए तिहार देवी–देवता, प्रकृति अउ गांव के परंपरा ले गहरा जुड़ाव रखथे।

देवारी तिहार के दिन गांव-गांव म लोग अपन ग्राम देवता, देवी–देवता अउ इष्ट देव के पूजा करथें। घर-घर म साफ-सफाई करके पूजा के तैयारी करे जाथे। लोग चावल, फूल, अगरबत्ती, दीप अउ पारंपरिक भोग चढ़ाके देवता ले गांव अउ परिवार के सुख-शांति के कामना करथें।

देवारी तिहार म देवारी नाचा के खास महत्व हे। गांव के युवक मन रंग-बिरंगे कपड़ा पहनके ढोल, मांदर के संग नाच-गान करथें। देवारी नाचा केवल मनोरंजन नई, बल्कि लोकआस्था अउ संस्कृति के प्रतीक आय। नाचा के दौरान देवी-देवता के गुणगान गाथें, जऊन लोकविश्वास ला मजबूत करथे।

ए तिहार समाज म एकता अउ सहयोग के भावना बढ़ाथे। देवारी के समय गांव के सब लोग—बड़े, छोटे, अमीर, गरीब—एक संग पूजा अउ उत्सव म शामिल होथें। ए तिहार म आपसी भेदभाव मिट जाथे अउ भाईचारा बढ़थे।

देवारी तिहार किसान जीवन ले भी जुड़ा हे। खेती के काम ले थोड़ा फुर्सत मिलते ही किसान मन देवारी तिहार म शामिल होके देवता ले अच्छी फसल अउ वर्षा के कामना करथें। ए तिहार प्रकृति अउ मेहनत के सम्मान के प्रतीक आय।

आज के आधुनिक समय म देवारी तिहार के रूप म कुछ बदलाव आय हें, फेर ओकर मूल भावना आजो कायम हे। अब कई जगह देवारी तिहार के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य अउ प्रतियोगिता भी रखे जाथें, जऊन छत्तीसगढ़ी संस्कृति के प्रचार-प्रसार करथे।

देवार तिहार छत्तीसगढ़ के लोकजीवन के आत्मा आय। ए तिहार मनखे ला अपन जड़, परंपरा अउ संस्कृति ले जोड़े रखथे। देवारी तिहार सिखाथे कि आस्था, एकता अउ परंपरा के सम्मान कर के ही समाज आगे बढ़ सकथे।

निष्कर्ष

देवारी तिहार केवल धार्मिक पर्व नई, बल्कि छत्तीसगढ़ के लोकसंस्कृति अउ सामाजिक एकता के प्रतीक आय। ए तिहार हमन ला अपन संस्कृति के संरक्षण अउ सम्मान करे के प्रेरणा देथे। देवारी तिहार के परंपरा ला जीवित रखे हमर सांस्कृतिक जिम्मेदारी आय। देवारी (देवउठनी) तिहार

देवारी तिहार कार्तिक शुक्ल पक्ष म मनाय जाथे। ए तिहार ग्राम देवता अउ देवी-देवता के पूजा से जुड़ा हे। देवारी नाचा, ढोल-मांदर के संग, ए तिहार के विशेष पहचान आय। देवारी तिहार आस्था अउ परंपरा के प्रतीक आय।


5. पोला तिहार

पोला तिहार भादो महीना म मनाय जाथे। ए तिहार बैल अउ पशुधन के सम्मान के पर्व आय। बैल मन ला नहला-धुला के सिंग सजाय जाथे। खेती म पशु के योगदान ला ए तिहार सम्मान देथे।


6. तीजा तिहार

तीजा तिहार भादो म महिलामन मनाथें। ए तिहार पति के लंबी आयु अउ परिवारिक सुख के कामना ले जुड़ा हे। महिलामन उपवास रखके पूजा करथें। तीजा नारी शक्ति अउ परंपरा के प्रतीक आय।


7. नवाखाई तिहार

नवाखाई नई फसल खाय के तिहार आय। ए तिहार किसान के मेहनत के फल के उत्सव आय। पहिली धान के भोग देवता ला चढ़ाके बाद म लोग खाथें। नवाखाई कृतज्ञता के प्रतीक आय।


8. गोंचा तिहार

गोंचा तिहार जगन्नाथ रथयात्रा ले जुड़ा हे। ए तिहार म बच्चे फल-बीज के गोंचा (खिलौना) चला के खेलथें। गोंचा तिहार बालमन के उत्सव आय।


✍️ निबंध–9 : छत्तीसगढ़ मोर माटी

छत्तीसगढ़ मोर माटी आय, मोर पहिचान आय। ए धरती जंगल, नदी, पहाड़ अउ हरियाली ले भरपूर हे। महानदी, शिवनाथ, इंद्रावती जइसन नदियाँ ए राज्य के जीवन रेखा आय। छत्तीसगढ़ के गांव म आजो सादगी अउ अपनापन देखे ला मिलथे।

इहाँ के लोकनृत्य पंथी, राउत नाचा अउ करमा बहुत प्रसिद्ध हें। छत्तीसगढ़ी भाषा म मिठास हे, जऊन सीधे दिल ला छू जाथे। किसान इहाँ के रीढ़ हें, जऊन मेहनत ले अन्न उगाथें।

छत्तीसगढ़ खनिज संपदा ले भरपूर हे, तभो ले इहाँ के लोग प्रकृति के रक्षा करथें। मोर छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नई, बल्कि संस्कृति अउ संस्कार के संगम आय।

निष्कर्ष:
हमें अपन छत्तीसगढ़ी संस्कृति अउ भाषा के सम्मान कर के आगू बढ़े के जरूरत हे।


✍️ निबंध–10 : शिक्षा के महत्व

शिक्षा मनखे के जीवन म उजाला लाथे। शिक्षा ले मनखे सही अउ गलत के पहचान करथे। बिना शिक्षा के समाज अधूरा रहिथे।

शिक्षा ले रोजगार के अवसर मिलथे अउ समाज म समानता बनथे। पढ़े–लिखे मनखे देश के विकास म योगदान देथें। आज के समय म लड़का–लड़की दूनो के शिक्षा बहुत जरूरी हे।

शिक्षा केवल किताब तक सीमित नई हे, बल्कि व्यवहार अउ संस्कार म भी दिखना चाही। शिक्षक समाज के निर्माता आय।

निष्कर्ष:
शिक्षा अपनाके ही हम मजबूत समाज अउ उज्ज्वल भविष्य बना सकथन।


✍️ निबंध–11 : पर्यावरण संरक्षण

पर्यावरण हमर जीवन के आधार आय। हवा, पानी, जंगल बिना जीवन संभव नई हे। आज प्रदूषण के कारण पर्यावरण खतरा म हे।

पेड़ काटे जा रहे हें, नदी प्रदूषित होवत हे अउ मौसम बदलत हे। ए सब के असर मानव जीवन म दिखत हे। अगर आज हम पर्यावरण के रक्षा नई करबो, त कल पछताना पड़ही।

हर मनखे ला एक पेड़ जरूर लगाना चाही। पानी बचाना अउ प्लास्टिक कम उपयोग करना जरूरी हे।

निष्कर्ष:
पर्यावरण बचेही, त मानव बचेही।


✍️ निबंध–12 : किसान मोर अन्नदाता

किसान देश के अन्नदाता आय। वो धूप, पानी, ठंड सब सहके खेत म मेहनत करथे। किसान बिना समाज जिना असंभव आय।

छत्तीसगढ़ म अधिकतर लोग खेती ऊपर निर्भर हें। धान, कोदो, कुटकी, मक्का इहाँ के प्रमुख फसल आय। किसान के मेहनत ले हमर घर म भोजन पहुंचथे।

आज किसान कई समस्या झेलत हे। सरकार अउ समाज दूनो ला किसान के मदद करे के जरूरत हे।

निष्कर्ष:
किसान के सम्मान करबो, त देश मजबूत होही।


✍️ निबंध–13 : समय के महत्व

समय बहुत कीमती आय। जऊन समय के कदर करथे, वो जीवन म सफल होथे। बीते समय लहू नई आ सकय।

समय के सही उपयोग ले काम आसान हो जाथे। आलस अउ टालमटोल समय के दुश्मन आय। विद्यार्थी जीवन म समय के महत्व अउ जियादा हे।

जो मनखे समय म काम करथे, वो आगे बढ़थे।

निष्कर्ष:
समय के सदुपयोग ही सफलता के कुंजी आय।


✍️ निबंध–14 : स्वच्छता ही सेवा

स्वच्छता ले स्वास्थ्य बने रहिथे। गंदगी बीमारी लाथे। साफ–सुथरा वातावरण मनखे ला खुश रखथे।

घर, स्कूल, गांव अउ शहर साफ रखे हमर जिम्मेदारी आय। कचरा सही जगह फेंकना अउ शौचालय के उपयोग जरूरी हे।

स्वच्छ भारत अभियान के उद्देश्य भी साफ देश बनाना आय।

निष्कर्ष:
स्वच्छ रहबो, स्वस्थ रहबो।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के लोक तिहार समाज ला जोड़के रखथें। ए तिहार मन संस्कृति, परंपरा अउ प्रकृति के संरक्षण के संदेश देथें। लोक तिहार के संरक्षण करे हमर सामूहिक जिम्मेदारी आय।

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